Tuesday, September 28, 2010
'अनौकी चीज़!'
ज़िन्दगी इक अनौकी तोफा है I
इसको खसके पकड़ो ,तो टूट जाता है ;
टीकसे न पकड़ो , थो छूट जथा है I
प्यार भी कैसी चीज़ है -
कितना भी दो तुमसे जाता नहीं ,
उससे टकराके फिर कुछ भाता नहीं I
प्यार और ज़िन्दगी घुल खिलाते है ज़रूर I
दोनों तीके तलवार हैं -
निशानियाँ छोड़ जाते हैं ज़रूर I
Friday, September 24, 2010
प्रणाम !
नमस्ते !
भगवान और मेरे दोस्त सभी को प्रणाम करके इस ब्लॉग को लिकती हूँ I
शुब लाभ !
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